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पुलवामा CRPF हमला: प्रेस कॉन्फ़्रेंस में हंस नहीं रही थीं प्रियंका गांधी

सोशल मीडिया पर कांग्रेस की महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा का एक 'स्लो-मोशन वीडियो' शेयर किया जा रहा है जिसके साथ लिखा है, "पुलवामा हमले के बाद प्रेस कॉन्फ़्रेंस में हंसती हुईं प्रियंका वाड्रा."

इस वीडियो को शेयर कर रहे लोगों ने यह ज़ाहिर करने की कोशिश की है कि ऐसे मुद्दों को लेकर प्रियंका गांधी गंभीर और संवेदनशील नहीं है.

हमने पाया कि उत्तर प्रदेश के लखनऊ में स्थित कांग्रेस पार्टी मुख्यालय पर गुरुवार देर शाम हुई प्रेस कॉन्फ़्रेंस के वीडियो को थोड़ा धीमा कर दिया गया है और इसे बिल्कुल ग़लत संदर्भ देकर शेयर किया जा रहा है.

कांग्रेस पार्टी द्वारा पहले से तय की गई प्रियंका गांधी की इस 'पहली प्रेस कॉन्फ़्रेंस' का पूरा वीडियो देखकर साफ़ हो जाता है कि ये दावा ग़लत है.

उनके इस ट्वीट को अब व्हॉट्सऐप पर शेयर किया जा रहा है और उनके द्वारा पोस्ट किए गए वीडियो को क़रीब 50 हज़ार बार देखा जा चुका है.

गुरुवार को जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में सीआरपीएफ़ के जवानों पर हुए चरमपंथी हमले की ख़बर आने के क़रीब चार घंटे बाद प्रियंका गांधी ने प्रेस कॉन्फ़्रेंस की शुरुआत इस संदेश के साथ की थी:

"जैसा कि आपको मालूम है, ये कार्यक्रम राजनीतिक चर्चा के लिए रखा गया था. लेकिन पुलवामा में जो आतंकवादी हमला हुआ है, उसमें हमारे जवान शहीद हुए हैं. इसलिए हम ये उचित नहीं समझते कि हम अभी राजनीतिक चर्चा करें."

प्रियंका गांधी ने इसके बाद कहा, "हम सबको बहुत दुख हुआ है. शहीदों के परिजन हौसला बनाए रखें. हम कंधे से कंधा मिलाकर उनके साथ खड़े हैं."

इसके बाद पार्टी नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया और राज बब्बर के साथ प्रियंका गांधी ने कुछ देर का मौन रखा और 4 मिनट में ही वो प्रेस कॉन्फ़्रेंस स्थल से निकल गई थीं.

कई मीडिया रिपोर्ट्स में लिखा गया है कि प्रियंका गांधी ने पुलवामा हमले में जवानों की मौत की ख़बर के बाद अपनी प्रेस कॉन्फ़्रेंस रद्द की.

लेकिन पुलवामा हमले को लेकर जब देश में जगह-जगह मातम मनाया जा रहा है, कुछ सोशल मीडिया यूज़र इसमें राजनीति तलाश रहे हैं.

लेकिन उनकी कहानी पर आने से पहले यह जानिए कि 2017 में जमा किए गए उनके अपने चुनावी शपथपत्रों के अनुसार उन पर फ़िलहाल देश की अलग-अलग अदालतों में हत्या, हत्या के प्रयास, हथियारबंद तरीक़े से दंगे भड़काने, आपराधिक साज़िश रचने, आपराधिक धमकियाँ देने, सम्पत्ति हड़पने के लिए धोखाधड़ी करने, सरकारी काम में व्यावधान पहुंचाने से लेकर जानबूझकर चोट पहुंचाने तक के 16 केस हैं.

एक वक़्त में उन पर मकोका (महाराष्ट्र कंट्रोल ऑफ़ ऑर्गनाइज्ड क्राइम ऐक्ट) और गैंगस्टर ऐक्ट के तहत 30 से ज़्यादा मुक़दमे दायर थे.

इनमें से कुछ अहम मामलों में अदालत ने सबूतों की कमी, गवाहों के पलट जाने और सरकारी वकील की कमज़ोर पैरवी के कारण इन्हें बरी कर दिया गया.

लेकिन भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विधायक कृष्णानंद राय की हत्या समेत 16 गंभीर मामलों में इन पर अब भी मुक़दमे चल रहे हैं.

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